कोरबा मानिकपुर स्कूल मे सहपाठी मिलन समारोह का आयोजन, कहीं गई मन की बात, और रखें गए अपने सुझाव
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कोरबा -बचपन की यादें और बचपन के दोस्त भुलाएं नहीं जातें है, वो यादगार पल वो हसीन मुलाक़ाते काफ़ी कुछ हद प्रसन्नता जाहिर होती है. बात कर रहें 1980 दशक बेच क्लास मैट की जो कोरबा के मानिकपुर माध्यामिक स्कूल मे एक साथ अपने स्कूल मे अपने दोस्तों क़ो पाकर गदगद नजर आये. अपने दिनचर्या और अपने जीवन शैली क़ो लेकर एक दूसरे क़ो अपने मन की बात रखी गई.अपने अनुभव क़ो साँझा करते हुए सहपाठीयो ने कहा की आज के दिनचर्या और 45 साल पुराने दिनों मे काफ़ी बदलाव हुए हैं, संघर्ष भरी जीवन और गरीबी मे अधिकांश लोग अपनी जीवन शैली क़ो काटे हैं.पढ़ाई लिखाई क़ो लेकर कुछ लोग जूनून बनाये तो कुछ लोगअपने काम क़ो लेकर अपने शिखर पर पहुंच गए हैं,छात्र छात्रों क़ो सहपाठीयो ने संबोधित करते हुए कहा की आज के युवा पीढ़ी अपने माता पिता और गुरुजनो क़ो पहले जैसे सम्मान नहीं देतें हैं, अपने माता पिता की बातो क़ो नज़रअंदाज करके दरकिनार कर देतें हैं, लेकिन ये युवा पीढ़ी क़ो ये मालूम नहीं होता हैं की ये माता पिता व गुरुजन उस वक्त क़ो गुज़ार चुके हैं, गुरुजनो के डांट फटकार और माता पिता की स्नेह आज हमें इस मुकाम पर पहुचाये हैं की सुक्रिया अदा नहीं किया जा सकता हैं. हम बच्चों क़ो यहीं शिक्षा देतें हैं की पढ़ाई क़ो महत्त्व व गुरुजनो क़ो सम्मान दें अगर भविष्य मे कुछ बनना हैं तो एक लक्ष्य बना कर चले , मेहनत और संघर्ष के पीछे अपनी कठनाईयों क़ो जो पार करेगा वहीं एक दिन इतिहास रचेगा. भले हीं हम सभी साथी नौकरी के मुकाम पर नहीं पहुंच पाए हैं लेकिन अपनी मेहनत और लगन से जीवन के पढ़ाव मे आगे निकल चुके हैं. जिस तरह से अपने दोस्तों और सहपाठीयो क़ो मिलकर आज खुशी जाहिर हुई की मन की पुरानी यादें ताज़ा हो गई हैं. फिलहाल इस पल क़ो हम लोग एक यादगार के रूप मे याद रखेंगे.

