प्रदेश के कैबिनेट मंत्री लखन लाल देवांगन का अनुमोदन लेटर का नहीं है कोई महत्व, कोरबा आदीवासी विभाग के अधिकारी श्रीकांत कसेर करते हैं दरकिनार, पाँच महीने से दिव्यांग को लौटा रहा है चक्कर
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कोरबा _प्रदेश के कैबिनेट और श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन का अनुमोदन लेटर का कितना महत्व है, इसका अंदाजा कोई नहीं लगा सकता है। लेकिन कोरबा जिले के आलाधिकारी इस लेटर को नहीं मनाते हैं। जिसका सीधा उदाहरण जनदर्शन में देखने को मिला है। मामला है आदीवासी विभाग का है। जो कोरबा करतला ब्लॉक के ग्राम पंचायत गिधौरी के एक दिव्यांग ने 50 सीटर छात्रावास में चपरासी पद के लिए मंत्री लखन लाल देवांगन के पास अर्जी लेकर पहुंचा था। जो विषम परिस्थितियों को देखते हुए मंत्री देवांगन जी ने अपने हाथों से लिखकर आदीवासी विभाग के सहायक आयुक्त श्री कांत कसेर से मिलने की बात कही। मंत्री जी से आश्वासन मिलने के बाद जब दिव्यांग दिलदार सिंह कंवर सहायक आयुक्त से मिले तो इन्होंने उल्टा जवाब देते हुए कहा कि पहले आपको सहारे की जरूरत है तो आपको कहा से नौकरी दे। अधिकारी की इस बात को सुनकर इन्हें बहुत आहत पहुंचा। फिर भी अपनी आस को लेकर जनदर्शन में कोरबा कलेक्टर अजीत वसंत से मिले जो आश्वासन के बाद अपनी पीड़ा व्यक्त की। ऐसा नहीं है कि दिलदार सिंह पढ़ा लिखा नहीं है, ये ग्रेजुएट और राज्य स्तरीय खेल प्रतिभागी खिलाड़ी भी है। लेकिन गरीबी की आड़ और परिवार की जिम्मेदारी ने हर कामों को करना दिलदार सिंह की मजबूरी हो गई है। इन्होंने ने ये भी आरोप लगाया कि जब किसी मंत्री या अधिकारी से आश्वासन मिलता है तो उम्मीद की किरण जाग उठती है। लेकिन मंत्त्री जी की दिखावटी हस्ताक्षर और अधिकारियों द्वारा मंत्री जी के आदेश का पालन नहीं करना समझ से परे।

